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परिचय : लेखक रामविलास शर्मा

Ramvilas Sharma 
रामविलास शर्मा (1912)

जीवन परिचय :- रामविलास शर्मा  का जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में सन् 1912 में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा गाँव में पाई। उच्च शिक्षा के लिए ये लखनऊ गए। वहाँ से इन्होंने अंग्रेजी में एम.. किया और विश्वविद्यालय के अंग्रेजी  विभाग में प्राध्यापक हो  गए। प्राध्यापन काल में ही इन्होंने पीएच.डी. की उपाधि अर्जित की। लेखन के क्षेत्र में पहले-पहले कविताएँ लिखकर फिर  एक उपन्यास और नाटक लिखने के बाद पूरी तरह से आलोचना कार्य में जुट गए। रामविलास शर्मा प्रगतिशील आलोचना  के सशक्त हस्ताक्षर  माने जाते हैं। इन्होंने गोस्वामी तुलसीदास और महाप्राण निराला के काव्य को नए निकष पर परखा।

साहित्यिक परिचय :- रामविलास शर्मा की प्रमुख कृतियाँ हैं : भारतेंदु और उनका युग, महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी  नवजागरण, प्रेमचंद और उनका युग, निराला की साहित्य साधना (साहित्य  साधना), भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिंदी (तीन खंड), भाषा और समाज, भारत में अंग्रेजी राज और मार्क्सवाद, इतिहास दर्शन, भारतीय संस्कृति और हिंदी प्रदेश, गांधी, अंबेडकरलोहिया और भारतीय इतिहास की समस्याएँ, बुद्ध वैराग्य  और  प्रारंभिक कविताएँसदियों के  सोए जाग उठे (कविता), पाप के पुजारी  (नाटक),  चार दिन (उपन्यास) और  अपनी धरती  अपने लोग (आत्मकथा)

पुरस्कार :- रामविलास शर्मा को साहित्य अकादमी, व्यास सम्मान, श्लाका सम्मान आदि से सम्मानित किया गया।  इन्होंने पुरस्कारस्वरूप   मिली  राशि साक्षरता प्रसार हेतु दान कर  दी।


पाठ के बारे में :- कई मुहावरों, लोकोक्तियों, देशज शब्दों और अन्य रचनाकारों की रचनाओं के उद्धरणों से ली गई सूक्तियों तथा पंक्तियों से ओत-प्रोत इस पाठ में लेखक ने धूल की महिमा और माहात्म्य, उपलब्धता और उपयोगिता का बखान किया है। अपनी किशोर और युवावस्था में पहलवानी के शौकीन रहे डॉ. शर्मा अपने इस पाठ के बहाने पाठकों को अखाड़ों, गाँवों और शहरों के जीवन-जगत की भी सैर कराते हैं। साथ ही धूल के नन्हें कणों के वर्णन से देश-प्रेम तक का पाठ पढ़ाने से नहीं चूकते। इस पाठ को पढ़ने के बाद पाठकधूल’ को यूँ ही धूल में उड़ा सकेगा।          


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आभारएनसीइआरटी (NCERT) Sparsh Part-2 for Class 10 CBSE

अध्याय : धूल

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