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बिहारी: दोहे

Bihari Ke Dohe
- बिहारी
        

1.
सोहत  ओढ़ैं पीतु  पटु  स्याम,  सलौनैं  गात।
मनौ  नीलमनि-सैल  पर  आतपु  परयो प्रभात।।

शब्दार्थ:-
सोहत - शोभायमान होनासुन्दर रूप में दिखना
औढ़े - ओढ़करपहनकर
पीतु - पीला
पटु - वस्त्र
स्याम - साँवले कृष्ण
सलौंने - सुन्दर
गात - शरीर
मनौ - मानो
नीलमनि-सैल - नीलम के पर्वत पर
आतपु - आकर
परयो - गिरता है
प्रभात - सुबह


2.
कहलाने  एकत  बसत  अहि  मयूर,  मृग  बाघ।
जगतु  तपोबन  सौ  कियौ  दीरघ-दाघ  निदाघ।।

शब्दार्थ:-
कहलाने  - कहे जाने भर के लिए
एकत  - एक साथ
बसत  - रहते हैं
अहि  - साँप
मयूर - मोर
मृग  - हिरण
बाघ - शेर
जगतु  - संसार को
तपोबन  - तप के जंगलऋषि-मुनि जहाँ साधना करते हो
सौ  - जैसा
कियौ  - कर दिया
दीरघ-दाघ  - बहुत गर्मी
निदाघ - ग्रीष्मकाल की/ गर्मी की ऋतु में

(तपोवन यानि वह वन जहाँ ऋषि&मुनिजन तपस्या करते हैं और उनके तप के प्रभाव से चारों ओर प्रेम का वातावरण बन जाता है।)

3.
बतरस-लालच  लाल  की  मुरली  धरी  लुकाइ।
सौंह  करैं  भौंहनु  हँसै,  दैन  कहैं  नटि  जाइ।।

शब्दार्थ:-
बतरस - बत यानि बात और रस यानि आनंद (बात करने के आनंद)
लाल - बालक कृष्ण
मुरली - बांसुरीवंशी
धरी - रख दी
लुकाइ - छिपा कर
सौंह- संकेत
भौंहनु - आँख की हड्डी पर जमे हुए बाल, भृकुटी
हँसै - हँसती है
दैन  कहैं - देने को कहने पर
नटि  जाइ - मना कर देती हैं।


4.
कहतनटतरीझतखिझतमिलतखिलतलजियात।
भरे  भौन  मैं  करत  हैं  नैननु  हीं  सब  बात।।

शब्दार्थ:-
कहत - कहना
नटत- मना करना
रीझत - मोहित होना
खिझत – झुंझलानाचिढ़ना
खिलत- चेहरे पर प्रसन्नता आना
लजियात - शरमा जानालजा जाना
भौन - घर
नैननु - आँखों से


5.
बैठि रही अति सघन बनपैठि सदन-तन माँह।
देखि  दुपहरी  जेठ  की  छाँहौं  चाहति  छाँह।।

शब्दार्थ:-
अति - बहुत
सघन - घने
बन - जंगल
पैठि - घुस जाना
सदन- घर
तन - शरीर
माँह - के भीतर
जेठ - हिन्दी में एक महीने का नाम लगभग जून का समय
छाँहौं - छाया
चाहति - इच्छा करना


6.
कागद पर लिखत न बनतकहत सँदेसु लजात।
कहिहै सबु तेरौ हियौमेरे हिय की बात।।

शब्दार्थ:-
कागद - कागज पर
कहत - कहते हुए
सँदेसु - सन्दे
लजात - शर्म आना
कहिहै - कह देता है
सबु - सब कुछ
हियौ - हृदयदिल


7.
प्रगट भए द्विजराज-कुलसुबस बसे ब्रज आइ।
मेरे  हरौ   कलेस  सब,  केसव केसवराइ।।

शब्दार्थ:-
प्रगट भए - पैदा हुए
द्विजराज - ब्राह्मण 
कुल - वं
सुबस - अच्छे कार्य करने के लिए या अच्छे कारणों से
बसे - रहना
ब्रज - ब्रज भूमि में
हरौ - दूर करो
कलेस - क्लेपीड़ादुःख
केसव - कृष्ण का एक नाम
केसवराइ- केशव का पुत्र ( बिहारी के पिता का नाम भी केशव था)


8.
जपमाला,  छापैं,  तिलक  सरै  न  एकौ  कामु।
मन-काँचै  नाचै  बृथा,  साँचै  राँचै  रामु।।

शब्दार्थ:-
जपमाला - भगवान का नाम लेने के लिए बनी मनकों की माला
छापैं - विभिन्न प्रकार के धार्मिक चिह्न
सरै - सम्भव होना
न - नहीं
एकौ - एक भी
कामु -कामकार्य
मन-काँचै - मन कच्चा है
नाचै -नाचता रहता है/ भटकता रहता है
बृथा - व्यर्थ ही बेकार ही
साँचै - सच्चा है
राँचै - रचा रहता हैलगा रहता है
रामु - राम की ओर


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 आभार: एनसीइआरटी (NCERT) Sparsh Part-2 for Class 10 CBSE

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