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आदमीनामा

  AADMINAMA
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 (1)

दुनिया में बादशाह है सो है वह भी आदमी                               
(इस संसार में राजा के समान जीवन बिताने वाला भी आदमी है)
और मुफ़लिस--गदा है सो है वो भी आदमी
(गरीब और फकीर का जीवन बिताने वाला भी आदमी है।)
ज़रदार बेनवा है सो है वो भी आदमी
(धन-दौलत से पूर्ण और कमजोर भी आदमी है।)
निअमत जो खा रहा है सो है वह भी आदमी
(स्वादिष्ट भोजन जिसे खाने को मिल रहा है, आदमी है )
टुकड़े चबा रहा है सो है वो भी आदमी

(दूसरों की दया पर निर्भर हो अपना जीवन बीता रहा है वह भी आादमी है।)

शब्दार्थ:
बादशाह : राजा के समान जीवन बिताने वाला
मुफ़लिस--गदा  : गरीब और फकीर
ज़रदार : धन-दौलत से पूर्ण
बेनवा : कमजोर
निअमत : स्वादिष्ट भोजन
टुकड़े चबा रहा : दूसरों की दया पर निर्भर


                                (2)

मसजिद भी आदमी ने बनाई है यां मियाँ
(ज़नाबयहाँ , इस संसार में मस्जिद का निर्माण भी आदमी के द्वारा ही किया गया है)
बनते हैं आदमी ही इमाम और खुतबाख्वाँ
(आदमी ही इन मस्जिदों में नमाज पढ़ने और कुरान का अर्थ समझानेवाले बनते हैं)
पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज़ यां
(आदमी ही यहाँ कुरान पढ़ते हैं और नमाज अदा करते हैं)
और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ
(इन लोगों की जूतियाँ चुराने का काम भी आदमियों के द्वारा ही किया जाता है।)
जो उनको ताड़ता है सो है वो भी आदमी
(जो बुरे कार्य करने वालों को पहचान लेता है वह भी आदमी ही होता है।)

शब्दार्थ:
यां मियाँ : ज़नाब
इमाम : मस्जिदों में नमाज पढ़नेवाले
खुतबाख्वाँ : कुरान का अर्थ समझानेवाले
ताड़ता है : पहचान लेता है


                               (3)

यां आदमी पै जान को वारे है आदमी
(यहाँ दूसरे की सहायता के लिए आदमी अपने प्राण देने तक के लिए तैयार हो जाता है।)
और आदमी पै तेग को मारे है आदमी
(यहाँ आदमी ही आदमी को तलवार मार देता है)
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
(आदमी की इज्जत को आदमी ही समाप्त कर देता है)
चिल्ला के पुकारे आदमी को है आदमी
(सहायता पाने के लिए जोर से आदमी को ही पुकारा जाता है: किसी को डराना हो तब भी आदमी चिल्ला के उसे  पुकारता है )
और सुनके दौड़ता है सो है वो भी आदमी
 (सहायता किए जाने की पुकार सुनकर आदमी ही सहायता करने को दौड़ा चला आता है)

शब्दार्थ:
जान को वारे : अपने प्राण देने तक के लिए तैयार
तेग : तलवार
पगड़ी उतारे : इज्जत समाप्त कर दे



                              (4)

अशराफ़ और कमीने से शाह ता वज़ीर
(शरीफ यानि अच्छे लोग और बुरे लागों (कमीने)  से लेकर राजा और उनके मंत्री भी)
ये आदमी ही करते हैं सब कारे (कामदिलपज़ीर
(ये सारे ही दिल को अच्छे लगने वाले काम करते हैं)
यां आदमी मुरीद है और आदमी ही पीर
(यहाँ आदमी ही शिष्य / चाहनेवाला होता है और आदमी ही साधू)
अच्छा भी आदमी ही कहाता है  नज़ीर
(अच्छे आदमी ही कि मिसाल दी जाती है यानि उसकी अच्छाइयों के उदाहरण दिए जाते हैं)
और सबमें जो बुरा है सो है वो भी आदमी
(इन सभी प्रकार के आदमियों में भी जो बुरा है वह भी आदमी ही है।)

शब्दार्थ:

अशराफ़ : शरीफ यानि अच्छे लोग
कमीने :  बुरे लोग
शाह : राजा
वज़ीर मंत्री
कारे : काम
दिलपज़ीर दिल को अच्छे लगने वाले
मुरीद : शिष्य चाहनेवाला
पीर साधू
नज़ीर मिसाल उदाहरण 



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द्वारा :- hindiCBSE.com
आभार: एनसीइआरटी (NCERT) Sparsh Part-1 for Class 9 CBSE

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