Right click unusable

हरिहर काका: लोकोक्तियाँ - मुहावरे

Harihar Kaka : Lokoktiyan - Muhavaren

1.            अपना - अपना मोर्चा सँभालना   :-    स्थिति संभालना, अपनी जिम्मेदारी निबाहना।
2.            आँखें भर आना  :-    दुःखी होना।
3.            आसमान से जमीन पर गिरना   :-     उच्च स्थिति से निम्न स्थिति पर आना।
4.            खुल कर बातें करना  :-   बिना संकोच के बात कहना।
5.            खून खौलना  :-   क्रोधित होना।
6.            चंपत हो जाना  :-   भाग जाना।
7.            चिकनी - चुपड़ी बातें करना  :-   दूसरे को अच्छी लगने वाली बातें करना।
8.            जी - जान से जुट जाना  :-   खूब प्रयास करना।
9.            जितने मुँह, उतनी बातें होना  :-   कई तरह की बातें होना।
10.          टोह में रहना  :-   जानकारी लेने के लिए प्रयास में रहना।
11.          तितर - बितर होना  :-   बिखर जाना।
12.          तूती  बोलना  :-   प्रभाव होना
13.          तू - तू  मैं - मैं होना  :-   झगड़ा होना।
14.          दिल पसीजना  :-   दया करना।
15.          दूध की मक्खी होना  :-   बेकार होना, किसी काम का होना।
16.          नमक-मिर्च लगाना  :-   बढ़ा - चढ़ाकर कहना।
17.          पाँव पखारना  :-   बहुत आदर देना।
18.          पाँव पसारना  :-   फैलाना।
19.          फूटी आँख सुहाना  :-   बिलकुल पसंद करना।
20.          बदन में आग लगना  :-  ईर्ष्या होना।
21.          बातें बनाना  :-   बहाने बनाना।
22.          भनक तक लगना  :-   पता लगना, खबर लगना।
23.          मँझधार में फँसना  :-   परेशानी में फँसना।
24.          मोह भंग होना  :-   सच्चाई का पता लगने पर मन बदलना।
25.          मुँह खुलना  :-   कुछ बताना।
26.          सहन शक्ति जवाब देना  :-   हिम्मत खत्म हो जाना।
27.          सिर - आँखों पर बिठाना  :-   अत्याधिक सम्मान देना।

*********

कोई टिप्पणी नहीं: