मीरा पद -1,2 : सरलार्थ

Meera : sarlarth 

मीरा ( पद-1 ) : सरलार्थ 

इस पद में मीरा ने भगवान विष्णु के द्वारा अपने भक्त के प्रति रखी जाने वाली प्रेम भावना (भक्तवत्सलता) को बताया है। विष्णु भगवान को हरि नाम से भी पुकारा जाता है। विष्णु भगवान ने ही कृष्ण के रूप में जन्म लिया। मीरा के अनुसार भगवान विष्णु अपने भक्तों को प्रेम करते हैं और उनके कष्टों को दूर करते हैं। वे उदाहरण देते हुए कहती हैं कि जब महाभारत काल में भरी सभा में द्रौपदी को अपमानित किए जाने का कार्य किया जा रहा था तब प्रभु ने ही उनके वस्त्र को बढ़ाकर उन्हें अपमानित होने से बचाया था। अपने अनन्य भक्तों में से एक प्रह्लाद के जीवन की रक्षा के लिए भगवान विष्णु नरसिंह का अवतार लेकर प्रकट हुए। अपने भक्त ऐरावत नामक हाथी को तालाब में मगरमच्छ ने पकड़ लिया तो विष्णु भगवान ने ही मगरमच्छ को मारकर अपने भक्त की जान बचाई थी। इस प्रकार उनके प्रभु बहुत ही दयालु और अपने भक्तों की पीड़ा को दूर करनेवाले हैं। मीरा अपने आराध्य से निवेदन करती हैं कि प्रभु आपने अपने भक्तों की पीड़ा को दूर किया है मैं मीरा भी आपकी दासी हूँ इसलिए मेरे कष्टों को भी आप दूर करें।

 

 मीरा ( पद-2 ): सरलार्थ 

मीरा इस पद में भगवान कृष्ण की सेविका बनकर उनका साथ पाना चाहती हैं। वे उनसे स्वयं को अपनी सेवा में रखने की कामना करती हैं।  वे कहती हैं कि हे गिरी को धारण करनेवाले, मुझे अपनी सेवा में रख लो। आपकी सेवा में रहते हुए बाग लगाने का कार्य करुँगी और इस प्रकार आपको प्रतिदिन देख सकूँगी। वृन्दावन की वाटिकाओं और उद्यानों से भरी गली में हे प्रभु ! आपकी लीला के गीत गाऊँगी। आपकी सेवा करते हुए मुझे आपके दर्शन प्राप्त होंगे; आपकी स्मृति सदा बनी रहेगी जो मेरे मेहनताने (पारिश्रमिक) के समान होगी। मुझे आपकी भावपूर्ण भक्ति करने का सौभाग्य मिलेगा जो मेरे लिए जागीर (साम्राज्य) के समान होगा। इस प्रकार आपकी सेवा में आने पर आपकी स्मृति, भक्ति और सामीप्य (नजदीकी) तीनों मनचाही बातें पूरी किए जाने का सौभाग्य प्राप्त होगा।

मीरा कृष्ण के रूप-सौन्दर्य का वर्णन करते हुए कहती हैं कि वे अपने मस्तक पर मोर के पंखों से बना मुकुट एवं गले में जंगल में पैदा होने वाले फूलों की माला धारण करते हैं। मीरा के प्रभु कृष्ण वृन्दावन में गाएँ चराते हैं और अपनी बांसुरी से सभी का मन मोहते हैं। मीरा कहती हैं कि ऊँचे-ऊँचे महल और उनके साथ तालाब, वाटिका और झरोखे बनाएँगी (बारी शब्द राजस्थान में प्रचलित बाड़ी शब्द का द्योतक है जिसका अभिप्राय छोटे तालाब और छोटे बगीचे से लिया जाता है। बारी शब्द का अर्थ झरोखा भी होता है। अत: हमें यहाँ यह समझना चाहिए कि बारी शब्द तालाबवाटिका और महल के झरोखों के लिए आया है।)



और फूलों के रंग की साड़ी पहनकर अपने स्वामी कृष्ण के दर्शन पाएँगी। मीरा भगवान कृष्ण के दर्शन पाने को अधीर हैं इसलिए प्रार्थना करती हैं कि वे यमुना नदी के किनारे आधी रात को ही अपने दर्शन प्रदान करें। वे बताती हैं कि उनके प्रभु तो नागर गिरधरअर्थात् भगवान कृष्ण हैं जिन्हें पाने के लिए उनका हृदय बहुत व्याकुल है।  (समाप्त)

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 आभार: एनसीइआरटी (NCERT) Sparsh Part-2 for Class 10 CBSE